
अभीतक न्यूज़ गौरव अरोरा थांदला (झाबुआ)
थांदला:- उज्जैन जिले के नागदा में पुलिस ने कुख्यात तस्कर सलमान लाला को 25.83 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ पकड़ा था। जिसका खुलासा उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने शुक्रवार को किया था। इस प्रकरण को लेकर झाबुआ पुलिस की सांसे भी फूली हुई है। क्योंकि सलमान लाला के फर्जी दस्तावेज झाबुआ जिले के थांदला के गुमनाम पते पर दर्ज है। पुलिस और प्रशासन के लिए सलमान लाला का वार्ड नबंर 13 का मकान अबूझ पहेली बन गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि न केवल उसने इस पते पर आधार कार्ड, वोटर आईडी बनवाया, ब्लकि फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाकर दुबई तक भाग गया था। फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट किस तरह से बने और कौन-कौन पुलिसकर्मी इस दौरान तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी जांच के दौरान तय करने में समय लग रहा है। साथ ही पुलिस चाहती है कि विधानसभा चुनाव के दौरान किस तरह से वार्ड 13. की वोटर लिस्ट में नाम जोड़ा गया। जिनके आधार पर अन्य दस्तावेज तैयार किए गए, यह पता लग जाए तो उस समय के बीएलओ, निर्वाचन कार्य देख रहे अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय हो सके। कुल मिलाकर गेंद को एक पाले से दूसरे पाले में गोल-गोल घुमाया जा रहा है।
एसडीओपी उतरे वार्ड 13 में, नहीं मिला 30 नबंर का मकान
सलमान लाला के पूरे मामले ने जब से तूल पकड़ा है, थांदला पुलिस की नींद उड़ गई है। शनिवार-रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को एसडीओपी आरएस राठी वार्ड 13 में उतरे। चूंकि सलमान लाला के दस्तावेजों में वार्ड 13 के मकान नबंर 30 का जिक्र है। इसलिए पूरे वार्ड में घूमकर 30 नबंर का मकान खोजा गया, परंतु नहीं मिला। नगर परिषद के रिकॉर्ड अनुसार वार्ड 13 में मकान नबंर 51 से शुरूआत होती है, जो 174 पर जाकर समाप्त होती है। ऐसे में 30 नबंर की तलाश करती हुई पुलिस अशोक चौहान के मकान नबंर 30 में पहुंची। पर यह 30 नबंर का मकान गनीमत से वार्ड 11 में निकला। पुलिस ने वहां पर रह रहे किरायेदारों के बारे में जानकारी हासिल की। इस पूरी कवायद में वार्ड 13 में न सलमान लाला का कोई परिचित मिला और नहीं मकान नबंर 30। इस दौरान पुलिस ने पूर्व पार्षदों को बुलाकर भी सलमान लाला के मकान और उसके परिचितों की जानकारी लेने की कोशिश की।
आखिर कैसे जुड़ा सलमान का निर्वाचन नामावली में नाम?
3 साल तक थांदला की निर्वाचन नामावली में सलमान लाला का नाम वार्ड 13 की मतदाता सूची में दर्ज रहा। सलमान का नाम नगर परिषद चुनाव वर्ष 2022, विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 की नामावली में दर्ज था। बाद में बीएलओ ने वेरीफिकेशन कर उसे डिलीट करवाया। निर्वाचन का काम देखने वाले लोगों का कहना है कि उसने ऑनलाइन आवेदन से नाम जुड़वाया होगा। परंतु सवाल तो यह भी है कि किसी ने तो मौके में वार्ड में जाकर उसका उस समय वेरिफिकेशन किया होगा। उस वक्त कौन बीएलओ था इस बारे में पुख्ता रूप से तहसील और नगर परिषद के अधिकारी भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।

पासपोर्ट वेरीफिकेशन में दो गवाह कौन?
पुलिस विभाग के पास सबसे महत्वपूर्ण कामों में से एक काम पासपोर्ट वेरीफिकेशन का भी होता है। चूंकि पासपोर्ट का उपयोग विदेश यात्रा में होता है, इसलिए आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड का न होना बहुत जरूरी है। परंतु सलमान लाला पर दर्ज मुकदमों का पुलिस वेरीफिकेशन तक नहीं करवा सकी। इस पर पुलिस का तर्क यह है कि उस दौरान आपराधिक रिकॉर्ज देखने के लिए ऑनलाइन सुविधाएं नहीं थी। सिर्फ थाना स्तर पर ही उसका सत्यापन किया जा था। साथ ही पासपोर्ट वेरीफिकेशन के लिए दो स्थानीय गवाह की जरूरत होती है, क्या सलमान लाला के केस में पुलिस अब तक उन गवाहों को नहीं ढूंढ पाई। या उस समय कोई और प्रक्रिया थी इसका जवाब भी पुलिस के पास ‘जांच चल रही है’ ही है।
थांदला में हिंदू समाज की आक्रोश रैली आज
सलमान लाला के फर्जी दस्तावेज के मामले से पूरा नगर आक्रोशित है। लोगों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन किस तरह से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है? यह सलमान लाला के प्रकरण से साफ है। विहिप और हिंदू जागरण मंच जहां पहले एसडीओपी को आवेदन दे चुके है। तो वहीं बुधवार को हिंदू समाज एक आक्रोश रैली निकाल कर एसडीएम को ज्ञापन देने की तैयारी में है।
एसपी की बंसत पंचमी परिचर्चा में छाया रहा सलमान लाला का कांड
झाबुआ एसपी पद्मविलोचन शुक्ल ने मंगलवार को बंसत पंचमी के उपलक्ष्य में पुलिस कंट्रोल रूप में पत्रकारों से परिचर्चा का आयोजन किया था। इस परिचर्चा में भी सलमान लाला के फर्जी दस्तावेजों की बातें उठी। परंतु जांच चल रही है यह बताकर उसे ठंडे बस्ते में डाला गया।
अगस्त से चल रही जांच में पुलिस को नहीं मिला था सलमान लाला
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार नागदा पुलिस ने अगस्त माह में सलमान लाला की जानकारी और उसके फर्जी दस्तावेजों के बारे में थांदला पुलिस के माध्यम से पता करवाया था। उस दौरान पुलिस को जांच में निर्वाचन नामावली में नाम तक नहीं मिल सका था। उसके पिछे कारण यह था कि लोकसभा चुनाव के दौरान वह नाम डिलीट कर दिया गया था। परंतु पुलिस ने पिछले वर्षों की वोटर लिस्ट को ढूंढने की कोई जेहमत नहीं उठाई। अगस्त से अब तक जांच के नाम पर कागजों में सलमान लाला को ढूंढने का ही काम पुलिस कर रही है।
एसडीओपी को जांच का जिम्मा दिया है
एसपी पद्मविलोचन शुक्ल ने कहा कि थांदला एडीओपी को जांच सौंपी है। 4-5 दिन में उनका प्रतिवेदन मिलेगा, जिसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
पुलिस गंभीरता से कर रही जांच
थांदला एसडीओपी रविंद्र सिंह राठी का कहना है इस मामले में पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है। सोमवार को वार्ड में जाकर मकान नबंर 30 को खोजा, जो नहीं है। पासपोर्ट को लेकर दस्तावेजों की जांच कर रहे है। अभी तक हमने किसी भी व्यक्ति को इस मामले में पूछताछ के लिए थाने नहीं बुलाया है।



